Browsing Category

राष्ट्रीय

जिन्ना और गांधी

नेताओं द्वारा असत्य के अंधाधुंध प्रयोग कहीं देश को नहीं ले डूबे, वक़्त रहते जिन्ना और गांधी के अंतर को समझिए।

सोवियत समाजवाद का पतन

दीर्घकालीन सैद्धांतिक और सांस्कृतिक संघर्ष चलाना होता है। सोवियत नेता ऐसा नहीं कर पाए। जिससे से सोवियत समाजवाद का पतन हुआ।

पाँच देशों के पाँच विद्रोह

बांग्लादेश में जिनका शासन है, वे नोबेल पुरस्कार प्राप्त हैं, लेकिन उनके अंदर मानवीय प्रेम की बेहद कमी है। हाल के वर्षों में सीरिया सहित पाँच देशों में विद्रोह हुए हैं।

मार्क्सवाद को खारिज नहीं किया जा सकता

आदिम समाज से लेकर, दासप्रथा, राजतंत्र और फिर पूंजीवादी व्यवस्था तक का सफर किया है। इसलिए विदेशी दर्शन बताकर मार्क्सवाद को खारिज नहीं किया जा सकता।

ड्रग्स सप्लाई का रूट बना भारत

अरब को ड्रग्स निगलने की आदत है। ड्रग्स सप्लाई के लिए सिंडिकेट बने हुए हैं और इनके अंदर खुदरा व्यापारी हैं। ख़बर यह है कि अरब को ड्रग्स सप्लाई का रूट बना भारत।

पूरे विश्व के लिए आदर्श है ‘सहकार से समृद्धि’ का भारतीय दर्शन

सहकारिता एक ऐसी व्यवस्था है, जो समाज में आर्थिक रूप से आकांक्षी लोगों को न सिर्फ समृद्ध बनाती है, बल्कि उन्हें अर्थव्यवस्था की व्यापक मुख्यधारा का हिस्सा भी बनाती है।

भूमंडलीकरण ने शिक्षा को बना दिया बिकाऊ माल

भूमंडलीकरण की शुरुआत सोवियत संघ एवं समाजवादी खेमो के विघटन के बाद हुई। इसी के साथ अपने देश में भूमंडलीकरण के अनुरूप शिक्षा क्षेत्र के पुनर्गठन की प्रक्रिया प्रारम्भ हुई।