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organic farming

राष्ट्रीय गोपालन नीति का लोक व्याख्यान

भारत की ग्रामीण अर्थव्यवस्था और संस्कृति में गाय का महत्व अनादि काल से रहा है। कृषि, आजीविका, पोषण और पर्यावरणीय संतुलन में गाय की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण है। इसी महत्व को ध्यान में रखते हुए सरकार ने राष्ट्रीय गोपालन नीति को अपनाया, जिसका…

गांवों में गौ-आधारित रोजगार योजना

भारत के ग्रामीण समाज में गाय केवल आस्था और संस्कृति का प्रतीक नहीं, बल्कि आजीविका का महत्वपूर्ण आधार भी रही है। आधुनिक समय में जब ग्रामीण युवाओं को रोजगार की कमी और पलायन जैसी समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है, तब गौ-आधारित रोजगार योजना एक…

गो-प्रोडक्ट स्टार्टअप्स: गाय से अर्थव्यवस्था तक

भारत में गाय केवल धार्मिक आस्था और परंपरा का प्रतीक नहीं है, बल्कि ग्रामीण अर्थव्यवस्था की मजबूत नींव भी है। बदलते समय के साथ गाय आधारित उत्पादों से जुड़े स्टार्टअप्स एक नई आर्थिक क्रांति का सूत्रपात कर रहे हैं। ये स्टार्टअप्स केवल दूध तक…

टीवी और समाचार पत्रों में गौशाला की भूमिका

भारत में गौशालाएँ केवल धार्मिक और सांस्कृतिक धरोहर का हिस्सा नहीं हैं, बल्कि वे सामाजिक, आर्थिक और पर्यावरणीय दृष्टिकोण से भी महत्वपूर्ण संस्थान मानी जाती हैं। इनकी भूमिका को समाज तक पहुँचाने और जनमानस में जागरूकता पैदा करने में टीवी और…

गाय आधारित वृक्षारोपण अभियान

भारत जैसे कृषि प्रधान देश में गाय केवल धार्मिक और सांस्कृतिक प्रतीक ही नहीं, बल्कि पर्यावरणीय संरक्षण और सतत विकास की आधारशिला भी है। "गाय आधारित वृक्षारोपण अभियान" इसी सोच का परिणाम है, जिसमें गायों के गोबर, गौमूत्र और जैविक अपशिष्टों का…

जैविक खेती में गाय की भूमिका

भारत की कृषि परंपरा सदियों से गाय पर आधारित रही है। गाय केवल दूध ही नहीं देती बल्कि उसका गोबर और गोमूत्र खेती के लिए अनमोल साधन साबित होते हैं। आधुनिक समय में जब रासायनिक उर्वरकों और कीटनाशकों ने भूमि की उर्वरता को कम कर दिया है, तब जैविक…

“स्वदेशी दिवस” के रूप में मनाया गया राजीव दीक्षित जी का पुण्यतिथि

आजाद भारत में स्वदेशी के सबसे बड़े प्रचारक एवं सुदृढ़ लोह स्तंभ राजीव दीक्षित जी की 14वीं पुण्यतिथि स्वदेशी दिवस के रूप में मनाई गई।

सरकार पंचगव्य पर ध्यान दे तो पूरे विश्व में पंचगव्य चिकित्सा की होगी धूम

सरकार को निरोगी और दीर्घायु होने की दिशा में आगे बढ़ना है तो एक नागरिक-एक देशी गाय और पंचगव्य चिकित्सा पर ध्यान देने की जरुरत।

चर्चा है चर्बी की

नेताओं की चढ़ी चर्बी चिंता का विषय रही है। बहुत ही चर्बीदार हो रहे हैं लोग। चर्बी का अपना एक वर्गीय चरित्र है। यह चर्बी वर्गविहीन समाज की स्थापना में बहुत बड़ी बाधा है। इस बाधा को दूर करने की सदियों-सदियों से कवायद हो रही है पर यह सवाल सनातन…