RCB ने दिखाई संवेदनशीलता, पीड़ित परिवार को देगा 25 लाख की मदद

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बेंगलुरु, 30 अगस्त 2025 – रॉयल चैलेंजर्स बेंगलुरु (RCB) ने एक बार फिर साबित किया है कि क्रिकेट केवल खेल ही नहीं, बल्कि समाज और इंसानियत के प्रति जिम्मेदारी का माध्यम भी है। हाल ही में एक दुखद हादसे में पीड़ित हुए परिवार की मदद के लिए RCB ने आगे आकर 25 लाख रुपये की आर्थिक सहायता देने का ऐलान किया है।

हादसे की पृष्ठभूमि

बेंगलुरु से जुड़े इस हादसे में एक परिवार ने अपनों को खो दिया और वे आर्थिक व मानसिक संकट में आ गए। जैसे ही इस घटना की खबर टीम प्रबंधन और खिलाड़ियों तक पहुंची, उन्होंने एकमत होकर पीड़ित परिवार की सहायता करने का निर्णय लिया।

RCB का कदम

टीम मैनेजमेंट ने तुरंत राहत राशि तय की और 25 लाख रुपये पीड़ित परिवार को देने की घोषणा की। RCB का कहना है कि यह मदद परिवार को फिर से सामान्य जीवन की ओर बढ़ने में सहयोग करेगी। साथ ही, फ्रेंचाइज़ी ने यह भी संकेत दिया है कि भविष्य में जरूरत पड़ने पर वे और भी सहयोग करने के लिए तैयार रहेंगे।

खिलाड़ियों की भावनाएँ

RCB के कुछ वरिष्ठ खिलाड़ियों ने सोशल मीडिया पर इस घटना पर दुख व्यक्त करते हुए कहा कि “किसी भी जीत या हार से बढ़कर इंसानियत होती है। हम चाहते हैं कि इस परिवार को यह एहसास हो कि पूरा क्रिकेट जगत उनके साथ खड़ा है।”

समाज के लिए संदेश

यह पहल केवल एक आर्थिक सहायता नहीं है, बल्कि पूरे समाज के लिए एक संदेश है कि जब भी कोई संकट आता है, तब खेल और खिलाड़ी सिर्फ मैदान तक सीमित नहीं रहते। वे लोगों के जीवन को छूते हैं और मुश्किल वक्त में सहारा बनते हैं।

RCB का यह कदम खेल और समाज के बीच गहरे संबंध को दर्शाता है। ऐसे प्रयास न केवल पीड़ित परिवार को सहारा देते हैं, बल्कि खेल प्रेमियों और आम जनता के दिलों में भी इंसानियत की लौ जगाते हैं। उम्मीद की जा सकती है कि अन्य खेल संस्थान और खिलाड़ी भी इस तरह के उदाहरणों से प्रेरणा लेकर आगे आएँगे।

कर्नाटक सरकार ने RCB को जिम्मेदार बताया था कर्नाटक सरकार की 17 जुलाई को रिपोर्ट सामने आई थी। रिपोर्ट में हादसे का जिम्मेदार RCB को बताया गया था। इसमें कोहली का भी जिक्र था। कर्नाटक सरकार ने कहा कि RCB ने चिन्नास्वामी में आयोजित विक्ट्री परेड के लिए सरकार से कोई अनुमति नहीं ली थी।

हालांकि, सरकार ने यह भी कहा कि आयोजन को अचानक रद्द करने से हिंसा भड़क सकती थी और शहर में कानून-व्यवस्था बिगड़ जाती। सरकार ने 15 जुलाई को हाईकोर्ट को रिपोर्ट सौंपी थी। सरकार ने कोर्ट में कहा था कि वे रिपोर्ट को गोपनीय रखना चाहते हैं लेकिन कोर्ट ने कहा कि ऐसी गोपनीयता के लिए कोई कानूनी आधार नहीं है।

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