हरिद्वार में गौसंरक्षण का सबसे प्रमुख केंद्र: कृष्णायन
हरिद्वार, जिसे गंगा की पावन नगरी और अध्यात्म का प्रमुख केंद्र माना जाता है, हमेशा से भारतीय संस्कृति, परंपरा और धार्मिक मूल्यों का धरोहर रहा है। इसी पवित्र भूमि पर स्थापित कृष्णायन गौशाला आज गौसंरक्षण और गौसेवा का सबसे प्रमुख केंद्र बन चुकी है। यह केवल एक आश्रयस्थल नहीं, बल्कि भारतीय सभ्यता और करुणा का जीवंत प्रतीक है।
कृष्णायन गौशाला में प्रतिदिन सैकड़ों गायों की सेवा की जाती है। यहां न केवल स्वस्थ और दूध देने वाली गायें संरक्षित की जाती हैं, बल्कि बीमार, घायल और परित्यक्त गायों को भी आश्रय प्रदान किया जाता है। गोसेवक उन्हें परिवार की तरह अपनाते हैं और उनकी देखभाल में पूरी निष्ठा से लगे रहते हैं। इस केंद्र की विशेषता यह है कि यह गौसंरक्षण को सेवा, संवेदना और विज्ञान से जोड़कर एक आदर्श मॉडल प्रस्तुत करता है।
कृष्णायन गौशाला में पशु चिकित्सा की आधुनिक सुविधाएं उपलब्ध हैं, जहां बीमार और घायल गायों का इलाज किया जाता है। साथ ही, पौष्टिक आहार, स्वच्छ वातावरण और नियमित देखरेख से गायों को पुनर्जीवन दिया जाता है। यह केंद्र केवल गायों की सुरक्षा तक सीमित नहीं है, बल्कि गौमूत्र और गोबर से जैविक उत्पाद बनाने जैसे नवाचारों को भी प्रोत्साहित करता है, जिससे ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलती है।
हरिद्वार आने वाले श्रद्धालु और पर्यटक इस केंद्र का हिस्सा बनकर न केवल गायों की सेवा करते हैं बल्कि भारतीय संस्कृति से भी गहराई से जुड़ते हैं। यहां का वातावरण लोगों को यह सिखाता है कि गाय केवल धार्मिक प्रतीक नहीं, बल्कि हमारे सामाजिक और पारिस्थितिक जीवन का अभिन्न अंग है।
इस प्रकार, कृष्णायन गौशाला हरिद्वार में गौसंरक्षण का सबसे प्रमुख केंद्र है, जहां सेवा और संवेदना के साथ आधुनिक चिकित्सा और नवाचार का संगम दिखाई देता है। यह केंद्र आने वाली पीढ़ियों को करुणा, पर्यावरण संतुलन और संस्कृति संरक्षण का मार्गदर्शन देता है।