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Indian Culture

गौसेवा में दान: एक आध्यात्मिक कर्म

भारत की संस्कृति में गौसेवा का विशेष महत्व रहा है। गाय को ‘कामधेनु’ और ‘माता’ का दर्जा दिया गया है, क्योंकि यह न केवल कृषि और दूध से जुड़ी आवश्यकताओं को पूरा करती है बल्कि समाज में धार्मिक, आध्यात्मिक और सांस्कृतिक मूल्यों की प्रतीक भी है।…

गाय आधारित त्योहार और मेलों की परंपरा

भारतीय संस्कृति में गाय का स्थान अत्यंत पवित्र और पूजनीय माना जाता है। गाय केवल कृषि और आजीविका का आधार नहीं, बल्कि धार्मिक, सामाजिक और सांस्कृतिक जीवन का भी महत्वपूर्ण हिस्सा है। इसी कारण देश के विभिन्न हिस्सों में गाय से जुड़े कई त्योहार…

लोककथाओं और भजनों में गाय का स्थान

भारतीय संस्कृति में गाय को मातृवत् सम्मान और पवित्रता का प्रतीक माना गया है। यह केवल एक पशु नहीं, बल्कि धार्मिक, सामाजिक और आर्थिक जीवन का अभिन्न अंग है। लोककथाओं, लोकगीतों और भजनों में गाय का उल्लेख अनगिनत बार मिलता है, जो इसकी महत्ता और…

गौधूलि वेला का वैज्ञानिक रहस्य

भारतीय संस्कृति में गौधूलि वेला को अत्यंत पवित्र और शुभ माना गया है। यह वह समय होता है जब दिन और रात एक-दूसरे से मिलते हैं, अर्थात सूर्यास्त के ठीक पहले और बाद का समय। परंपराओं में इस वेला को पूजा-पाठ, दीप प्रज्वलन और गायों के गौशाला लौटने…

पुराणों में गौसंरक्षण की कथाएँ

भारतीय संस्कृति में गाय केवल एक पशु नहीं, बल्कि मातृत्व, सहिष्णुता और पोषण का जीवंत प्रतीक है। पुराणों में अनेक कथाओं के माध्यम से गाय की महिमा और गौ-संरक्षण का संदेश दिया गया है। ये कथाएँ हमें न केवल धर्म और भक्ति से जोड़ती हैं, बल्कि…

हिंदू पर्वों में गौमाता की भूमिका

भूमिका:- भारतीय संस्कृति में गौमाता को केवल एक पालतू पशु नहीं, बल्कि ‘माता’ का दर्जा प्राप्त है। हिंदू धर्म में गाय को धार्मिक, सामाजिक और आध्यात्मिक दृष्टि से अत्यंत पूजनीय माना गया है। विभिन्न पर्वों और अनुष्ठानों में गौमाता की उपस्थिति…

क्या भगवान श्रीकृष्ण की गोपाल लीलाएँ आज भी प्रासंगिक हैं.

भगवान श्रीकृष्ण भारतीय संस्कृति के सबसे विलक्षण और बहुआयामी व्यक्तित्वों में से एक हैं। उनके जीवन की प्रत्येक लीला चाहे बाल्यकाल की हो या कुरुक्षेत्र की, उसमें गहरा दर्शन और जीवन का मार्गदर्शन छिपा है। गोपाल लीलाएँ श्रीकृष्ण के बचपन की वे…

पंचगव्य का आध्यात्मिक और वैज्ञानिक महत्व

भारतीय संस्कृति में गाय को माँ का दर्जा प्राप्त है। गौ माता से प्राप्त पाँच उत्पादों — दूध, दही, घी, गोमूत्र और गोबर — को मिलाकर जो विशेष मिश्रण तैयार होता है, उसे पंचगव्य कहते हैं। यह न केवल धार्मिक दृष्टिकोण से पवित्र माना गया है, बल्कि…