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#Gauseva

डिजिटल पत्रकारिता में गौ-संवाद

आज के डिजिटल युग में पत्रकारिता केवल समाचार तक सीमित नहीं रही, बल्कि समाज और संस्कृति के हर पहलू को व्यापक स्तर पर सामने लाने का माध्यम बन चुकी है। भारत में गाय केवल धार्मिक प्रतीक नहीं, बल्कि ग्रामीण अर्थव्यवस्था, पर्यावरणीय संतुलन और…

गौसेवा पर लघु फिल्म परियोजनाएँ

भारत में गाय केवल एक पशु नहीं, बल्कि “गौ माता” के रूप में श्रद्धा का प्रतीक है। ग्रामीण जीवन, कृषि, पर्यावरण और आस्था में गाय की केंद्रीय भूमिका रही है। आधुनिक समय में जब युवा पीढ़ी दृश्य माध्यमों से अधिक प्रभावित होती है, तो लघु फिल्में…

भटकती गायों को सुरक्षित घर देने की पहल

भारत में सड़कों पर घूमती, भूखी-प्यासी और घायल गायें अक्सर देखने को मिल जाती हैं। यह दृश्य न केवल दयनीय होता है बल्कि समाज और पर्यावरण दोनों के लिए चिंता का विषय भी बन जाता है। ऐसे में विभिन्न संस्थाओं और गौशालाओं द्वारा शुरू की गई भटकती…

कैसे कृष्णायन गौशाला गायों को पुनर्जीवन देती है?

भारत में गौशालाएँ केवल गोसेवा का केंद्र नहीं होतीं, बल्कि यह हमारी संस्कृति, परंपरा और ग्रामीण जीवन की धुरी मानी जाती हैं। हरिद्वार स्थित कृष्णायन गौशाला इस परंपरा का जीवंत उदाहरण है। यहाँ गायों को केवल आश्रय ही नहीं मिलता, बल्कि उनका…