गाय आधारित कृषि प्रणाली का पुनरुत्थान
भारत की कृषि परंपरा सदियों से प्राकृतिक संसाधनों और जैविक पद्धतियों पर आधारित रही है, जिसमें गाय का स्थान अत्यंत महत्वपूर्ण रहा है। भारतीय ग्रामीण अर्थव्यवस्था में गाय केवल दूध देने वाला पशु नहीं, बल्कि कृषि की रीढ़ मानी जाती रही है। आधुनिक रासायनिक खेती के दौर में जब मिट्टी की उर्वरता घटने, उत्पादन लागत बढ़ने और स्वास्थ्य समस्याओं जैसी चुनौतियां सामने आ रही हैं, तब गाय आधारित कृषि प्रणाली का पुनरुत्थान समय की आवश्यकता बन गया है।
गाय का कृषि में महत्व
गाय न केवल किसान को दूध और उससे जुड़े उत्पाद देती है, बल्कि उसके गोबर और गौमूत्र का कृषि में बहुमुखी उपयोग होता है। गोबर से तैयार किया गया जैविक खाद मिट्टी की उर्वरता बढ़ाता है, उसकी जलधारण क्षमता को बनाए रखता है और सूक्ष्मजीवों की संख्या में वृद्धि करता है। गौमूत्र प्राकृतिक कीटनाशक के रूप में कार्य करता है, जिससे रासायनिक कीटनाशकों की आवश्यकता घटती है। साथ ही, बैल हल चलाने, खेत की जुताई और परिवहन के पारंपरिक साधन रहे हैं, जिससे डीज़ल और पेट्रोल पर निर्भरता कम होती है।
रासायनिक खेती से आई समस्याएं
पिछले कुछ दशकों में हरित क्रांति और रासायनिक खाद–कीटनाशकों के अत्यधिक उपयोग से उत्पादन तो बढ़ा, लेकिन मिट्टी की संरचना और स्वास्थ्य पर प्रतिकूल असर पड़ा। जलस्रोत प्रदूषित हुए, लागत बढ़ी और किसानों पर कर्ज का बोझ भी बढ़ा। ऐसे में टिकाऊ और पर्यावरण-अनुकूल खेती के लिए गाय आधारित पद्धति फिर से आकर्षण का केंद्र बन रही है।
गाय आधारित खेती के लाभ
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पर्यावरण संरक्षण – जैविक खाद और प्राकृतिक कीटनाशकों से भूमि, जल और वायु प्रदूषण कम होता है।
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मिट्टी की गुणवत्ता में सुधार – गोबर और गोमूत्र से बने घोल सूक्ष्म पोषक तत्वों की भरपाई करते हैं।
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कम लागत – बाहरी रासायनिक इनपुट की आवश्यकता घटने से लागत घटती है।
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स्वस्थ उत्पादन – रसायनमुक्त फसलें स्वास्थ्य के लिए बेहतर होती हैं और बाजार में अधिक मूल्य प्राप्त कराती हैं।
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ग्रामीण अर्थव्यवस्था में सशक्तिकरण – डेयरी, गोबर गैस और जैविक खाद निर्माण से अतिरिक्त आय के अवसर बढ़ते हैं।
पुनरुत्थान के उपाय
गाय आधारित कृषि प्रणाली को पुनर्जीवित करने के लिए सरकार, गैर-सरकारी संस्थाओं और किसानों के संयुक्त प्रयास आवश्यक हैं। इसमें गौशालाओं का सुदृढ़ीकरण, जैविक खाद और कीटनाशक बनाने के प्रशिक्षण, बाजार में जैविक उत्पादों के लिए बेहतर दाम, और पारंपरिक कृषि पद्धतियों पर शोध शामिल होना चाहिए।
निष्कर्ष
गाय आधारित कृषि केवल एक खेती की तकनीक नहीं, बल्कि भारतीय संस्कृति, परंपरा और पर्यावरण संतुलन की आधारशिला है। आधुनिक युग में इसका पुनरुत्थान न केवल किसानों की आर्थिक स्थिति सुधार सकता है, बल्कि मिट्टी, जल और मानव स्वास्थ्य की रक्षा में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है। यदि इसे व्यापक रूप से अपनाया जाए, तो यह कृषि क्षेत्र को टिकाऊ, लाभकारी और आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में एक बड़ा कदम होगा।